सुबोध सिंह ब्यूरो रिपोर्ट, बांका ,बिहार
डिजिटल इंडिया की बढ़ती रफ्तार में दम तोड़ रहे ग्राहक सेवा केंद्र, संचालक छोड़ रहे कारोबार
केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया पहल के तहत जहां ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल बैंकिंग को तेजी से बढ़ावा मिला है, वहीं इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) पर भी साफ दिखाई देने लगा है। शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र में विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा पंचायत स्तर पर खोले गए ग्राहक सेवा केंद्र, जो कभी ग्रामीणों के लिए बैंकिंग सेवाओं का सबसे बड़ा सहारा थे, आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। लेनदेन में लगातार गिरावट के कारण कई संचालकों ने अपना केंद्र बंद कर दिया है।
प्रखंड क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक एवं ग्रामीण बैंक के कई ग्राहक सेवा केंद्र पहले प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपये तक की जमा-निकासी का कारोबार करते थे। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी और गांव में ही अधिकांश बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हो जाती थीं। लेकिन जैसे-जैसे पेटीएम, गूगल पे, फोनपे, यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान सेवाओं का विस्तार हुआ, ग्राहक सेवा केंद्रों में लेनदेन तेजी से घटता चला गया। वर्तमान में कई केंद्रों पर प्रतिदिन 10 से 20 हजार रुपये का भी कारोबार नहीं हो पा रहा है।
शंभू बाजार स्थित यूको बैंक के पूर्व ग्राहक सेवा केंद्र संचालक प्रवीण कुमार प्रेमी ने बताया कि पहले उन्हें बैंकिंग कार्य से प्रतिमाह आठ से दस हजार रुपये तक का कमीशन मिल जाता था, जिससे परिवार का खर्च आसानी से चल जाता था। लेकिन डिजिटल भुगतान के बढ़ते प्रचलन के कारण बैंकिंग कार्य लगभग समाप्त हो गया। इसके साथ ही बैंक अधिकारियों द्वारा बीमा पॉलिसी कराने का लगातार दबाव और लक्ष्य पूरा करने की चेतावनी भी दी जाती थी।
बैंक कोड खत्म कर देने कि धमकी दिया जाता है। कई बार बीमा से जुड़े विवाद थाने तक पहुंच गए, हाल ही में भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड के यूको बैंक करहरिया के अंतर्गत शरीफा गांव में संचालित ग्राहक से केन्द्र संचालक को एक ग्राहक का अटल पेंशन योजना का बीमा करना महंगा पड़ गया था उनके विरुद्ध मामला थाना पहुंच गया था इसके बाद पुलिस ग्राहक सेवा केन्द्र संचालक को बुलाकर थाना में कई घंटे तक हिरासत में रखकर शक्ति से पूछताछ की किया था। इस मामले में वह काफी मानसिक तनाव में हो गया था।
उन्होंने बताया कि बैंकिंग कार्य से आय नगण्य होने के कारण परिवार का भरण-पोषण मुश्किल हो गया। मजबूर होकर उन्हें ग्राहक सेवा केंद्र बंद करना पड़ा। वर्तमान में वे एक निजी संस्थान में सुरक्षा गार्ड की नौकरी कर प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये कमा रहे हैं और उसी से परिवार का गुजारा कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राहक सेवा केंद्र बंद होने से बुजुर्गों, महिलाओं और दूर-दराज के लोगों को बैंकिंग सेवाओं के लिए अब फिर बैंक शाखाओं का चक्कर लगाना पड़ रहा है। लोगों ने बैंकों और सरकार से ग्राहक सेवा केंद्र संचालकों के लिए नई नीति बनाने तथा उन्हें वैकल्पिक रोजगार एवं पर्याप्त प्रोत्साहन देने की मांग की है, ताकि ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था फिर से मजबूत हो सके।
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