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ब्रेकिंग : नौकरी दिलाने के नाम पर 5.60 लाख की ठगी का आरोप, न्याय के लिए दर दर भटक रही कैंसर पीड़िता

 कुणाल शेखर/सुबोध सिंह न्यूज टीम,बांका भागलपुर

नौकरी दिलाने के नाम पर 5.60 लाख की ठगी का आरोप, कैंसर पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

बांका जिले के एक महिला से नौकरी दिलाने के नाम पर 5 लाख 60 हजार रुपये की कथित ठगी का एक संवेदनशील मामला सामने आया है। सबसे मार्मिक पहलू यह है कि शिकायतकर्ता महिला कैंसर की चौथी स्टेज से जूझ रही है और इलाज के लिए आर्थिक तंगी का सामना कर रही है। पीड़िता का आरोप है कि खुद को सीआईडी का डीएसपी बताने वाले ने कृषि विश्वविद्यालय सबौर में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे लाखों रुपये ले लिए, लेकिन न नौकरी दिलाई और न ही रकम वापस की। अब पीड़िता न्याय के लिए थाना, कोर्ट और पुलिस अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर है।

जानकारी के अनुसार, बांका के आदर्शनगर निवासी अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार सिंह की पुत्री सोनम भारती ने दस्तावेजों के साथ गंभीर आरोप लगाए हैं। सोनम का कहना है कि वर्ष 2024 में नौकरी की तलाश के दौरान उसकी मुलाकात मनोज वर्मा के नाम से एक व्यक्ति से हुई थी। आरोप है कि उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय सबौर में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अलग-अलग किश्तों में ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से कुल 5.60 लाख रुपये लिए। इसके बावजूद न तो नौकरी मिली और न ही पैसे लौटाए गए।

पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2025 में उसे कैंसर की चौथी स्टेज होने की जानकारी मिली। वर्तमान में उसका इलाज कोलकाता में चल रहा है और अब तक 22 बार कीमोथेरेपी हो चुकी है। तलाकशुदा होने के कारण वह पहले से आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रही है और इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत है।

सोनम का आरोप है कि पैसे वापस मांगने पर पहले टालमटोल की गई, बाद में उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद उसने बांका थाना में शिकायत दर्ज कराई। वहां से जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला भागलपुर के इशाकचक थाना भेजा गया, लेकिन वहां से भी उसे पुनः बांका जाने की सलाह दी गई।

न्याय की उम्मीद में पीड़िता वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह के पास पहुंची। उनके परामर्श पर उसने डीआईजी विवेक कुमार से मुलाकात की। डीआईजी ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।



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