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अंग क्षेत्र के किस मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप विकसित कर बिहार के धार्मिक पर्यटन स्थल में किया जाएगा शामिल

    सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार 

तिलडीहा दुर्गा मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की प्रशासनिक तैयारी शुरू

शंभूगंज प्रखंड स्थित तिलडीहा दुर्गा मंदिर को भव्य धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने पहल तेज कर दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद शुरू हो चुकी है। 

बुधवार को बांका के जिलाधिकारी नवदीप शुक्ला, उप विकास आयुक्त उपेन्द्र सिंह, एसडीएम राज कुमार और शंभूगंज के बीडीओ नीतीश कुमार सहित अन्य अधिकारियों की टीम मंदिर परिसर पहुंची और प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए भूमि का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मंदिर परिसर और आसपास की जमीन का बारीकी से आकलन किया। प्रारंभिक तौर पर यह संकेत मिले हैं कि मंदिर को भव्य स्वरूप देने के लिए केवल सरकारी जमीन पर्याप्त नहीं होगी।

ऐसे में योजना के विस्तार के लिए आसपास की रैयती भूमि के अधिग्रहण पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन  तैयार कर जल्द ही राज्य सरकार को भेजा जाएगा।प्रस्तावित योजना के तहत मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसमें आकर्षक मुख्य द्वार, धर्मशाला, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था और परिसर का सौंदर्यीकरण शामिल है। 

साथ ही मंदिर तक पहुंचने वाले मार्गों को चौड़ा और सुदृढ़ करने की भी योजना है, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके। इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि मंदिर के विकसित होने से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय बाजारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। हालांकि रैयती जमीन के संभावित अधिग्रहण को लेकर कुछ लोगों ने चिंता भी जताई है। 

इस पर प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ लागू की जाएगी। उल्लेखनीय है कि तिलडीहा दुर्गा मंदिर पूर्वी बिहार का एक प्रमुख आस्था केंद्र है, जहां शारदीय नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में यह मंदिर की अलग पहचान हो सकता है।



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