सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार
देश सेवा का गौरव: 30 साल तक सेना में डटे रहे शैलेश, गांव लौटे तो गूंज उठा ‘जवान जिंदाबाद’
शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र के गुलनी कुशाहा गांव में शनिवार को देशभक्ति और गर्व का अद्भुत नजारा देखने को मिला। 30 वर्षों तक भारतीय थल सेना में अपनी सेवा देकर सेवानिवृत्त हुए शैलेश कुमार के गांव लौटने पर ग्रामीणों ने उनका भव्य और भावुक स्वागत किया। जैसे ही उनके अजगैबीनाथ धाम रेलवे स्टेशन पहुंचने की सूचना मिली, पूरे गांव में उत्साह की लहर दौड़ गई।
ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ जिलानी पथ होते हुए हनुमान मंदिर के समीप एकत्रित हो गए। शैलेश कुमार के पहुंचते ही “भारत माता की जय” और “जवान जिंदाबाद” के नारों से वातावरण गूंज उठा। लोगों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया और अपने वीर सपूत को कंधों पर उठाकर सम्मान जताया। इस दौरान हर आंख में गर्व और खुशी साफ झलक रही थी।
इस मौके पर शैलेश कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि “जवान कभी रिटायर्ड नहीं होता, उसका जज़्बा और देशभक्ति जीवनभर कायम रहती है।” उन्होंने अपने तीन दशक लंबे सैन्य जीवन को याद करते हुए बताया कि 30 मार्च 1996 को अंबाला कैंट में उन्होंने पहली बार बतौर जवान अपनी ड्यूटी शुरू की थी। कठिन परिश्रम और अनुशासन के बल पर उन्होंने सिग्नल टेलीकॉम विभाग में कार्य करते हुए सुबेदार पद तक का सफर तय किया।
उन्होंने बताया कि सेना में भर्ती होने से पहले उनका जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। वे तारापुर से अखबार लाकर गांव के लोगों तक पहुंचाते थे और इसी दौरान उन्होंने मेहनत और जिम्मेदारी का महत्व सीखा। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि “जीवन एक निरंतर संघर्ष है, और जो इस संघर्ष को स्वीकार करता है, वही सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचता है।”
शैलेश कुमार ने यह भी कहा कि अब वे अपने गांव में रहकर सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे और युवाओं को सही दिशा देने का प्रयास करेंगे। उनके इस संकल्प से ग्रामीणों में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार हुआ है।
इस अवसर पर गोविंद प्रसाद सिंह, दिनेश सिंह, रमेश सिंह, शिवपूजन सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और हर कोई अपने इस वीर सपूत पर गर्व करता नजर आया।
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