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इंसानियत शर्मसार :अवैध नर्सिंग होम संचालक ने प्रसूता को बंद कर फरार, कैसे बची प्रसुता की जिंन्दगी

    प्रीतम सुमन APP न्यूज नेटवर्क ,बांका बिहार 

चंद रुपयों के लालच में इंसानियत शर्मसार: अवैध नर्सिंग होम संचालक ने प्रसूताओं को बंद कर फरार, प्रशासनिक कार्रवाई से बची चार जिंदगियां

बांका जिले के अमरपुर बाजार में इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां चंद रुपयों के लालच में एक अवैध नर्सिंग होम संचालक ने मानवता की सारी सीमाएं पार कर दीं। जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम की छापेमारी की सूचना मिलते ही पुरानी चौक स्थित अवैध नर्सिंग होम का संचालक चार कराहती प्रसूताओं को अंदर बंद कर मौके से फरार हो गया। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि लालच के सामने संवेदनहीनता की भयावह तस्वीर भी उजागर कर दी है।

जानकारी के अनुसार, प्रशासन को लंबे समय से उक्त नर्सिंग होम के अवैध रूप से संचालित होने की शिकायत मिल रही थी। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम ने जब छापेमारी की योजना बनाई और मौके पर पहुंची तो अंदर से कराहने की आवाजें सुनाई दीं। दरवाजा बाहर से बंद था और अंदर चार प्रसूताएं गंभीर हालत में फंसी हुई थीं। स्थिति बेहद संवेदनशील थी, क्योंकि प्रसव के बाद उचित चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलने से उनकी जान पर खतरा मंडरा रहा था।

छापेमारी टीम में शामिल चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र कुमार और डॉ. दीप्ति सिन्हा ने तत्परता दिखाते हुए तुरंत रेस्क्यू अभियान चलाया। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से दरवाजा खुलवाकर चारों प्रसूताओं को बाहर निकाला गया। इसके बाद बिना देर किए एम्बुलेंस से उन्हें रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के प्रयास और समय पर मिली चिकित्सा सुविधा के कारण चारों महिलाओं की जान बच गई।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि अवैध नर्सिंग होम संचालक मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन को ऐसे संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है और फरार संचालक की तलाश में पुलिस जुट गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जिले में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम और क्लीनिकों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि इलाज के लिए केवल मान्यता प्राप्त अस्पतालों और चिकित्सकों का ही चयन करें।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि लालच के सामने इंसानियत भले ही कमजोर पड़ जाए, लेकिन सही समय पर संवेदनशील और जिम्मेदार लोगों की पहल से जिंदगी बचाई जा सकती है। छापेमारी टीम के चिकित्सकों और प्रशासन की तत्परता ने चार परिवारों को मातम से बचा लिया और यह संदेश दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है।



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