सुबोध सिंह ,क्राइम रिपोर्टर बांका, बिहार
कौड़ी लूटने उमड़ी भीड़, बोधन कलश के साथ कसबा में 17 दिन की पूजा शुरू
ढोल-ढाक और शंख की गूंज के बीच तालाब से मंदिर पहुंचा बोधन कलश, बंग्ला रीति-रिवाज से होगी मां दुर्गा की आराधना
बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड के कसबा गांव स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर में आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। सुबह से ही गांव का माहौल भक्तिमय था। कहीं ढोल-ढाक की गूंज सुनाई दे रही थी तो कहीं शंख और घंटियों की ध्वनि के बीच मां दुर्गा के जयकारे लग रहे थे।
बोधन नवमी तिथि के प्रवेश के साथ पंडित और आचार्य के नेतृत्व में श्रद्धालुओं की टोली गांधी मैदान के समीप बाबू साहब तालाब पहुंची। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बोधन कलश में जल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालु कलश लेकर मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए मंदिर पहुंचे। यहां बंग्ला रीति-रिवाज के अनुसार विधि-विधान से बोधन कलश की स्थापना की गई। इसके साथ ही मंदिर में 17 दिवसीय दुर्गा पूजा और दुर्गा सप्तशती पाठ शुरू हो गया।
कलश स्थापना के बाद मंदिर परिसर में वर्षों पुरानी कौड़ी लूटने की परंपरा निभाई गई। जैसे ही कौड़ियां लुटाई गईं, उन्हें पाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ मच गई। महिलाएं और पुरुष कौड़ी पाने के लिए उत्साहित नजर आए। कुछ ही देर में मंदिर परिसर में कौड़ी बटोरने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कौड़ी घर में रखने से मां दुर्गा की कृपा बनी रहती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि आती है। कई महिलाएं कौड़ी को सिंदूरदान में रखती हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु इसे तिजोरी अथवा पूजा स्थल में रखते हैं।
कसबा दुर्गा मंदिर में कौड़ी लूटने की परंपरा केवल बोधन कलश स्थापना तक सीमित नहीं है। पूजा के दौरान चतुर्थी और सप्तमी तिथि को भी कौड़ियां लुटाई जाएंगी। इन दोनों अवसरों पर भी आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। ग्रामीणों के लिए यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ गांव की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुकी है।
पंडित अंबुज सरखेल, पुरोहित पितांबर झा, पूजा समिति के अध्यक्ष मुकुंद कुमार दास, अमरजीत दास और रविशंकर घोष सहित ग्रामीणों ने बताया कि जिउतिया पर्व के बाद बोधन नवमी तिथि को कलश स्थापना की परंपरा है। इसके बाद लगातार 17 दिनों तक बंग्ला रीति-रिवाज से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना होगी। मंदिर में दुर्गा सप्तशती का पाठ भी निर्धारित अवधि तक चलता रहेगा। शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि को विधि-विधान से पूजा की पूर्णाहुति की जाएगी।
कसबा दुर्गा मंदिर की पूजा परंपरा का इतिहास पश्चिम बंगाल से जुड़ा बताया जाता है। मेढ़पति राड़ी कायस्थ परिवार के सदस्यों के अनुसार पश्चिम बंगाल के दालपोलसा जिले के हरभल्लव दास ने इस मंदिर की स्थापना की थी। इसी वजह से यहां आज भी मां दुर्गा की पूजा के अधिकांश अनुष्ठान बंग्ला विधि-विधान और परंपरा के अनुसार संपन्न होते हैं। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन मंदिर की पूजा पद्धति और इससे जुड़ी परंपराएं आज भी उसी श्रद्धा के साथ कायम हैं।
बोधन कलश की स्थापना के साथ कसबा गांव में अगले 17 दिनों तक आस्था और उत्सव का माहौल बना रहेगा। मंदिर में रोजाना पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही होगी। वहीं, चतुर्थी और सप्तमी को होने वाली कौड़ी लूट को लेकर भी ग्रामीणों में खासा उत्साह है।
.png)









