सूरजकांत ,ब्यूरो रिपोर्ट पटना ,बिहार
यूसीसी पर बिहार में गरमाई सियासत, भाजपा-जदयू के रिश्तों पर उठे सवाल
जदयू ने बिहार में लागू करने का किया विरोध, राजद ने नीतीश कुमार को दिया साथ आने का न्योता; भाजपा ने भी रखा अपना रुख
बिहार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए के भीतर राजनीतिक मतभेद चर्चा में हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एनडीए शासित राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू करने की बात कहे जाने के बाद जदयू ने बिहार को लेकर अलग रुख सामने रखा है। जदयू नेता श्याम रजक ने 14 सितंबर को कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसे लागू नहीं होने दिया जाएगा।
इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में भाजपा और जदयू के बीच मतभेद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, जदयू के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इससे पहले कहा था कि पार्टी विधेयक के प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद निर्णय लेगी और गठबंधन सहयोगियों से भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
दूसरी ओर, भाजपा की ओर से बिहार में यूसीसी लागू करने की बात कही गई है। भाजपा विधायक नीरज कुमार बबलू ने 15 सितंबर को कहा कि बिहार में सरकार यूसीसी लागू करेगी। इससे दोनों सहयोगी दलों के रुख में अंतर और स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
इसी राजनीतिक खींचतान के बीच राजद ने जदयू को एनडीए से अलग होकर महागठबंधन के साथ आने का खुला प्रस्ताव दिया है। राजद नेता भाई वीरेंद्र ने नीतीश कुमार और जदयू को भाजपा से अलग होकर सरकार बनाने का न्योता दिया।
अब राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि यूसीसी का मुद्दा बिहार एनडीए की राजनीति को किस दिशा में ले जाएगा। फिलहाल जदयू के विरोध के बावजूद गठबंधन टूटने या नीतीश कुमार के किसी नए राजनीतिक गठजोड़ में जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आगे की तस्वीर सहयोगी दलों के बीच होने वाली बातचीत और यूसीसी पर जदयू के अंतिम रुख से स्पष्ट होगी।
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