कुणाल शेखर ब्यूरो रिपोर्ट, भागलपुर बिहार
घुटनों के बल बाबा धाम की ओर बढ़ रहे सुबोध, बेटे का साथ बना तपस्या की ताकत
सावन माह में सुल्तानगंज से देवघर तक के कांवड़िया पथ पर शिवभक्ति के अनगिनत रंग देखने को मिल रहे हैं। कोई नंगे पांव चलकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने निकल पड़ा है, तो कोई दंडवत यात्रा कर अपनी आस्था प्रकट कर रहा है। इसी बीच कांवड़िया पथ पर एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जिसने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया है।
लखीसराय निवासी सुबोध कुमार घुटनों के बल बाबा बैद्यनाथ धाम की कठिन यात्रा कर रहे हैं। उनकी तपस्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच से सात दिनों में वह महज सात किलोमीटर की दूरी ही तय कर सके हैं। इसी गति से यात्रा जारी रही तो उन्हें बाबा धाम पहुंचने में दो महीने से भी अधिक समय लग सकता है।
इस कठिन संकल्प में उनके पुत्र का समर्पण भी लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। बेटा पिता के आगे-आगे फोम बिछाता चलता है, ताकि घुटनों पर पड़ने वाला दबाव और दर्द कुछ कम हो सके। इसके बावजूद केवल कुछ किलोमीटर की यात्रा में ही सुबोध कुमार के दोनों घुटने बुरी तरह छिल चुके हैं। घाव और असहनीय पीड़ा के बावजूद उनके कदम नहीं रुके हैं।
सुबोध कुमार का कहना है कि उन्होंने बाबा भोलेनाथ से मनौती मानी है और किसी भी परिस्थिति में अपनी यात्रा अधूरी नहीं छोड़ेंगे। उनका कहना है कि चाहे जितना समय लगे और कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, वह बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचकर ही अपनी तपस्या पूर्ण करेंगे।
कांवड़िया पथ से गुजरने वाले श्रद्धालु सुबोध कुमार की इस अद्भुत साधना को देखकर भाव-विभोर हो रहे हैं। कई लोग उन्हें प्रणाम कर आशीर्वाद ले रहे हैं, तो कुछ लोग उनकी सेवा के लिए आगे बढ़ रहे हैं। सुबोध कुमार की यह कठिन यात्रा कांवड़िया पथ पर आस्था, संकल्प, त्याग और अटूट विश्वास की एक अनूठी मिसाल बन गई है।
.png)



