प्रीतम सुमन ,ब्यूरो रिपोर्ट, बांका बिहार
संघर्षों की तपिश में तपकर चमके भलुआर के लाल, पीएचडी सम्मान से बढ़ाया बांका का गौरव
बांकाअमरपुर प्रखंड के भलुआर गांव के युवा शिक्षाविद एवं समुखिया डिग्री कॉलेज, बांका के व्याख्याता डॉ. कुंदन कुमार यादव को तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने पर सम्मानित किए जाने से पूरे क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें ग्रामीण अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध एवं शैक्षणिक योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। इस उपलब्धि से भलुआर गांव ही नहीं, बल्कि पूरे बांका जिले का मान बढ़ा है।
सम्मान समारोह में ग्रामीण अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्रा, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बालकृष्ण झा, डॉ. कुमारी सुदामा यादव सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. यादव के शोध कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
डॉ. कुंदन कुमार यादव की सफलता संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है। साधारण किसान परिवार से आने वाले डॉ. यादव ने आर्थिक अभावों के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखी। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा उच्च विद्यालय मेढ़ियानाथ से प्राप्त की, जबकि इंटरमीडिएट मारवाड़ी महाविद्यालय, स्नातक डीएनएस महाविद्यालय और ग्रामीण अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से किया। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक विकास विषय पर शोध कर पीएचडी की उपाधि हासिल की।
वर्तमान में वह समुखिया डिग्री कॉलेज, बांका में व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। कृषि, ग्रामीण विकास, डेयरी अर्थव्यवस्था तथा किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर उनके कई शोधपत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।
सम्मान की खबर गांव पहुंचते ही ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी। लोगों ने कहा कि डॉ. यादव ने यह सिद्ध कर दिया है कि कठिन परिश्रम और स्पष्ट लक्ष्य के बल पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के लिए नई प्रेरणा देगी।
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