सुबोध सिंह ,क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार
पांच जलमीनार, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरसे 200 परिवार
बेला गांव में 'हर घर नल का जल' योजना फेल, ग्रामीणों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'हर घर नल का जल' योजना शंभूगंज प्रखंड की वैदपुर पंचायत के बेला गांव के वार्ड संख्या-11 में दम तोड़ती नजर आ रही है। हैरत की बात यह है कि एक ही वार्ड में पांच-पांच जलमीनार स्थापित होने के बावजूद करीब 200 परिवारों को नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी योजनाएं बंद पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों में पीएचईडी विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2017 में ग्राम पंचायत द्वारा दो जलमीनार बनाए गए थे, जिन्हें बाद में पीएचईडी के अधीन कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2025-26 में विभाग ने तीन और जलमीनार का निर्माण कराया। इस तरह एक ही वार्ड में कुल पांच जलमीनार होने के बावजूद लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी पांचों जलमीनार या तो बंद पड़े हैं या तकनीकी खराबी के कारण नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है।
जलापूर्ति ठप रहने से महिलाएं और बच्चे रोजाना दूर-दराज के चापाकलों एवं निजी बोरिंग से पानी लाने को मजबूर हैं। प्रमोद यादव, विकास यादव, सुजीत यादव, नीरज यादव, प्रिंस यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं हुई तो वे प्रखंड मुख्यालय पर आमरण अनशन शुरू करेंगे।
इधर, वैदपुर पंचायत के पूर्व मुखिया सह जदयू के जिला उपाध्यक्ष राजीव रंजन ने गुरुवार को बेला गांव पहुंचकर ग्रामीणों की समस्या सुनी। उन्होंने बीडीओ से मिलकर तत्काल जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पूरे मामले से जिलाधिकारी एवं मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।
विभाग के जेई क्या बोले ---?
बेला गांव के ग्रामीणों की शिकायत प्राप्त हुई है। सभी जलमीनारों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। जहां भी खराबी मिलेगी, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कर जल्द से जल्द नियमित जलापूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।"
— सुबोध कुमार, कनीय अभियंता, पीएचईडी, शंभूगंज
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