सुबोध सिंह क्राइम रिपोर्टर, बांका, बिहार
बारिश की बेरुखी से शंभूगंज में धान रोपाई की रफ्तार थमी, लक्ष्य से काफी पीछे कृषि कार्य
11,128 हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक मात्र 1,900 हेक्टेयर में हुई रोपाई, किसान अच्छी बारिश का कर रहे इंतजार
मानसुन की कमजोर सक्रियता का असर अब शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र की खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण धान की रोपाई का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो गया है। खेतों में पानी का अभाव रहने से किसान चाहकर भी रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। समय बीतने के साथ किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि धान की खेती पूरी तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यदि जल्द अच्छी वर्षा नहीं हुई तो रोपाई में और विलंब होने से फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शंभूगंज प्रखंड की 19 पंचायतों में इस वर्ष 11,128 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन अब तक मात्र 1,900 हेक्टेयर क्षेत्र में ही धान की रोपाई हो सकी है। यानी कुल लक्ष्य का लगभग 17 प्रतिशत ही कार्य पूरा हो पाया है। अधिकांश खेत अब भी सूखे पड़े हैं, जिससे किसानों की उम्मीदें आसमान पर टिकी हुई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण रोपाई संभव नहीं हो पा रही है। कुछ किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर रोपाई करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन डीजल और बिजली की बढ़ती लागत के कारण यह व्यवस्था सभी किसानों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में अधिकांश किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में यदि लगातार वर्षा हो जाती है तो रोपाई का कार्य तेजी से पूरा किया जा सकता है।
इस संबंध में शंभूगंज प्रखंड कृषि पदाधिकारी संकट तिवारी ने शुक्रवार शाम करीब छह बजे बताया कि अभी मानसून का समय चल रहा है और विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी। उन्होंने कहा कि मौसम अनुकूल होते ही किसान तेजी से धान की रोपाई करेंगे तथा विभाग को पूरा विश्वास है कि निर्धारित लक्ष्य को हासिल कर लिया जाएगा। कृषि विभाग किसानों के संपर्क में है और समय-समय पर उन्हें तकनीकी सलाह भी दी जा रही है।
फिलहाल शंभूगंज प्रखंड के हजारों किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। समय पर अच्छी वर्षा होने पर ही धान की रोपाई में तेजी आएगी और खरीफ मौसम की सबसे महत्वपूर्ण फसल का उत्पादन सुरक्षित रह सकेगा। वहीं कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर पर्याप्त बारिश हो जाती है तो लक्ष्य के अनुरूप रोपाई पूरी होने की संभावना बनी रहेगी।
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