सुबोध सिंह क्राइम रिपोर्टर, बांका ,बिहार
रोपनी के लिए पानी को तरसे किसान, अमरपुर-शंभूगंज में गहराया सिंचाई संकट
राजद नेता संजय चौहान ने सरकार से पूछा सवाल ,लघु सिंचाई विभाग के ₹900 करोड़ कहां गए
सावन का महीना शुरू होने के बावजूद अमरपुर और शंभूगंज प्रखंड में धान की रोपनी पर जल संकट का साया मंडरा रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं होने और सिंचाई के पारंपरिक जलस्रोत सूख जाने से किसानों के सामने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। क्षेत्र की अधिकांश नदियां, तालाब, पइन, आहर, बांध तथा झिटका सिंचाई योजना के जलस्रोत पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। जिन किसानों ने किसी तरह धान का बिचड़ा तैयार किया था, वह भी अब पानी के अभाव में सूखने की कगार पर पहुंच गया है। इससे किसानों में चिंता के साथ-साथ नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर शिक्षाविद एवं राजद नेता संजय चौहान ने राज्य सरकार और लघु सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि लघु सिंचाई विभाग पर खर्च किए गए करीब 900 करोड़ रुपये का लाभ किसानों को क्यों नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि यदि इतनी बड़ी राशि सिंचाई योजनाओं पर खर्च हुई है तो आज किसान रोपनी के लिए पानी के लिए क्यों भटक रहे हैं। सरकार को इस राशि का सार्वजनिक और पारदर्शी हिसाब देना चाहिए।
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| संजय चौहान , राजद नेता बांका |
संजय चौहान ने कहा कि अमरपुर और शंभूगंज कृषि प्रधान क्षेत्र हैं, जहां अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं। हर वर्ष किसान समय पर धान की रोपनी कर बेहतर उत्पादन की उम्मीद करते हैं, लेकिन इस बार बारिश की कमी और सिंचाई व्यवस्था के कमजोर होने से खेती संकट में पड़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सिंचाई योजनाएं वर्षों से बंद पड़ी हैं, जबकि कई का रखरखाव नहीं होने से वे बेकार हो चुकी हैं।
उन्होंने सरकार से सभी आहर, पइन, तालाब, बांध एवं बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं का तत्काल सर्वे कर उन्हें पुनर्जीवित करने, किसानों को डीजल अनुदान, मुफ्त सिंचाई सुविधा तथा फसल क्षति की स्थिति में उचित मुआवजा देने की मांग की।
वहीं क्षेत्र के किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की तैयारी की थी, लेकिन अब फसल चौपट होने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई या वैकल्पिक सिंचाई की व्यवस्था नहीं की गई, तो इस वर्ष धान उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा और इसका सीधा प्रभाव किसानों की आय के साथ जिले की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
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