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ब्रेकिंग न्यूज : प्रेम के आगे बेबस परिवार और पंचायत, नाबालिक प्रेमी जोड़े का मामला प्रशासन के लिए बनी चुनौती

 उमाकांत पोद्दार APP न्यूज रिपोर्टर, बांका बिहार 

इश्क़ की राह में खामोश खड़ा समाज, टूटते रिश्तों के बीच प्रशासन बना सवाल

किसे इल्ज़ाम दें, किसको कहें अपना हमदर्द,
यहाँ रिश्तों की गलियों में भी उठता है दर्द…

बांका जिले के आनंदपुर थाना क्षेत्र के उत्तरी बारने पंचायत स्थित बिराजपुर गांव में एक नाबालिग प्रेमी जोड़े का मामला इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा और बहस का केंद्र बना हुआ है। सामाजिक और पारिवारिक विरोध के बावजूद दोनों की एक साथ रहने की जिद ने हालात को ऐसा मोड़ दे दिया है, जहाँ समाज, परिवार और प्रशासन सभी असहाय नजर आ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार किशोर और किशोरी एक ही गांव के रहने वाले हैं और रिश्ते में भाई-बहन बताए जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि दोनों के बीच प्रेम संबंध की शुरुआत लगभग तीन वर्ष पूर्व भैरोगंज हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। साथ पढ़ने और एक ही गांव से आने-जाने के कारण दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गईं। बताया जाता है कि दोनों वर्तमान में इंटरमीडिएट के छात्र-छात्रा हैं।

कभी घर की दीवारें समझाती रहीं उन्हें,
पर दिल की जिद ने हर समझ को ठुकरा दिया…

जानकारी के अनुसार करीब एक वर्ष पूर्व भी दोनों घर छोड़कर चले गए थे, जिन्हें बाद में परिजनों ने खोजकर बांका से बरामद किया और घर वापस लाया गया। परिवार और समाज ने उन्हें समझाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन समय के साथ उनके संबंधों में कोई बदलाव नहीं आया।

ग्रामीणों के अनुसार 22 जून को दोनों एक बार फिर घर से निकल गए और बाद में किसी मंदिर में विवाह करने का दावा करते हुए गांव लौट आए। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव और विवाद की स्थिति गहराती चली गई। किशोर के पिता ने इस रिश्ते को सामाजिक और पारिवारिक रूप से स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। बताया जाता है कि किशोर अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।

नसीहतें भी थक गईं, समझाइशें भी हार गईं,
दो दिलों की जिद के आगे सारी रस्में हार गईं…

मामले को सुलझाने के लिए बुधवार को सरपंच हरीश ठाकुर की अध्यक्षता में ग्रामीणों और समाज के लोगों की बैठक आयोजित की गई। पंचायत में दोनों को समझाया गया कि वे अपने परिवार की बात मानें और अलग रहकर पढ़ाई पर ध्यान दें, लेकिन दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में अलग नहीं रहेंगे। उनके इस रुख के बाद पंचायत भी असहाय नजर आई।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार प्रयासों के बावजूद समाधान न निकलने से अब मामला प्रशासनिक हस्तक्षेप की ओर बढ़ रहा है। यदि दोनों नाबालिग हैं, तो यह मामला बाल विवाह निषेध अधिनियम और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों के दायरे में आ सकता है।

हालांकि आनंदपुर थाना अध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि पुलिस को अब तक कोई लिखित सूचना या आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलने पर मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल सिर्फ इश्क़ का नहीं, कानून की दस्तक का है,
क्योंकि खामोश गांव के पीछे बड़ा दस्तावेज़ का हक़ है…

फिलहाल बिराजपुर गांव का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों के नाबालिग होने और कथित विवाह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



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