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ब्रेकिंग न्यूज : यहां तो कागज पर मनरेगा योजना से खुद रही डांढ़, खाते से निकल रही लाखों की राशि

सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार


शंभूगंज के पौकरी पंचायत में मनरेगा में लाखो की बंदरबांट का आरोप: कागज पर खुद रही डांढ़, खाते से निकल रही लाखों की राशि

पौकरी पंचायत में एक दर्जन से अधिक योजनाओं में फर्जीवाड़े की शिकायत, ग्रामीणों ने डीएम और मुख्य सचिव से की जांच की मांग

सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत व्यापक स्तर पर कार्य करा रही है, वहीं शंभूगंज प्रखंड की पौकरी पंचायत में इस योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि की लूट-खसोट का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत में कई योजनाएं केवल कागजों पर संचालित दिखाकर लाखों रुपये की निकासी कर ली गई है, जबकि धरातल पर कार्य नगण्य या पूरी तरह गायब है।

ग्रामीणों द्वारा जिला पदाधिकारी एवं मुख्य सचिव को भेजे गए शिकायत पत्र में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंचायत के विभिन्न गांवों में संचालित मनरेगा योजनाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। शिकायत के अनुसार ग्राम भलुआ में रामानंद साह खेत से राजेंद्र मंडल खेत तक डांढ़ की खुदाई (योजना संख्या IC/20506008), ग्राम बसबेता में अरविंद सिंह खेत से अशोक सिंह खेत तक डांढ़ की खुदाई (IC/20629786), रामविलास सिंह खेत से मनीष सिंह खेत तक डांढ़ की खुदाई (IC/20629781) तथा ग्राम बिहार भलुआ में शंकर यादव खेत से सुभाष यादव खेत तक डांढ़ की खुदाई (IC/20624982) सहित एक दर्जन से अधिक योजनाओं में अनियमितता बरती गई है।

भलुआ गांव के ग्रामीण पारसमणि मंडल, नरेश प्रसाद, जीवन मंडल, गौतम सिंह समेत अन्य लोगों का आरोप है कि इन योजनाओं में वास्तविक कार्य कराए बिना ही मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर राशि की निकासी की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई योजनाओं में फर्जी तस्वीरें अपलोड कर कार्य पूर्ण होने का दावा किया गया है, जबकि मौके पर जाने पर कार्य स्थल खाली मिलता है। ग्रामीणों के अनुसार अब तक करीब 30 लाख रुपये से अधिक की राशि संदिग्ध तरीके से निकाली जा चुकी है। मनरेगा योजना की विकास राशि लूट करने में सबसे बड़ा योगदान पंचायत रोजगार सेवक की है। 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल संबंधित मनरेगा कर्मियों, पंचायत स्तर के कुछ जिम्मेदार पदाधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। उनका कहना है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर फर्जी भुगतान संभव नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सभी योजनाओं की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले कर्मियों और अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे राज्य सरकार के शिकायत पोर्टल सहित अन्य उच्चस्तरीय मंचों पर भी मामला उठाएंगे। उनका कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना गरीब मजदूरों के लिए रोजगार का माध्यम है, लेकिन कुछ लोगों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है।

गौरतलब है कि आगामी एक जुलाई से मनरेगा योजना को राज्य सरकार की नई पहल ‘जी-रामजी’ योजना के साथ जोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे समय में सामने आए इस तरह के आरोपों ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं आरोपों को लेकर पंचायत रोजगार सेवक ने कहा कि सभी योजनाओं में नियमानुसार कार्य कराया गया है और बिना काम के किसी भी प्रकार की राशि निकासी नहीं हुई है। उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।

इस संबंध में मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी मु. अब्दुल गफूर ने कहा कि हाल के दिनों में उक्त पंचायत में मनरेगा योजनाओं के तहत भुगतान हुआ है। ग्रामीणों द्वारा शिकायत की गई है, जिसकी जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायत सही साबित होती है तो यह मामला मनरेगा में बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।



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