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बांका के मजदूर की दिल्ली में सड़क दुर्घटना में हुई मौत, मचा कोहराम

सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार

दिल्ली की सड़क दुर्घटना में शंभूगंज के मजदूर की मौत, चार बेटियों के सिर से उठा पिता का साया

बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र के विरनौधा गांव निवासी मजदूर विवेकानंद ठाकुर (35) की दिल्ली में सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो जाने से गांव में मातम पसरा हुआ है। घटना की सूचना गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी संध्या कुमारी, मां नानकी देवी तथा अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस हृदयविदारक घटना से स्तब्ध हैं।

जानकारी के अनुसार विवेकानंद ठाकुर घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी करने दिल्ली गए थे। वह बल्लभगढ़ स्थित एक कंपनी में मजदूरी का कार्य करते थे। बताया जा रहा है कि करीब दो माह पूर्व ही वह अपने घर से दिल्ली गए थे ताकि मेहनत-मजदूरी कर परिवार की जरूरतों को पूरा कर सकें।

घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि विवेकानंद ठाकुर ड्यूटी समाप्त करने के बाद बाइक से अपने क्वार्टर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पीछे से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन अस्पताल ले जाने के दौरान ही रास्ते में उनकी मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मौत की खबर जैसे ही विरनौधा गांव पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मृतक की पत्नी संध्या कुमारी अपने पति की याद में बदहवास होकर रोती रही, वहीं मां नानकी देवी बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। पिता रंजीत ठाकुर भी बेटे की मौत से गहरे सदमे में हैं। गांव की महिलाएं पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच रही हैं।

मृतक दो भाइयों में सबसे बड़े थे। छोटा भाई दयानंद ठाकुर गांव में रहकर माता-पिता के साथ जीविकोपार्जन करता है। विवेकानंद ठाकुर अपने पीछे पत्नी और चार पुत्रियों को छोड़ गए हैं। उनकी बेटियों का नाम पूजा कुमारी, श्वेता कुमारी, अंजली कुमारी और पलक कुमारी है। पिता की असमय मौत के बाद चारों बच्चियों के भविष्य को लेकर परिवार की चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि विवेकानंद ठाकुर बेहद मेहनती और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वह गांव छोड़कर दिल्ली में मजदूरी कर रहे थे। लेकिन सड़क हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। गांव में घटना के बाद शोक का माहौल बना हुआ है और लोगों का लगातार मृतक के घर पहुंचना जारी है।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है और अब कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने चारों बेटियों की पढ़ाई और पालन-पोषण के लिए सरकारी मदद देने की अपील की है।



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