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ब्रेकिंग न्यूज : सम्राट मंत्रिमंडल का विस्तार, बांका को किया दरकिनार, रूकेगी विकास की रफ्तार

सुबोध सिंह/विपिन सिंह APP न्यूज डेस्क रिपोर्ट, बांका

पांचों सीट जिताने के बावजूद बांका को नहीं मिला मंत्री पद, सम्राट मंत्रिमंडल विस्तार से बढ़ी नाराजगी

बिहार विधानसभा चुनाव में बांका जिले की जनता ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर पूरा भरोसा जताते हुए जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर एनडीए प्रत्याशियों को जीत दिलाई थी। चुनाव परिणाम आने के बाद जिलेवासियों को उम्मीद थी कि नई सरकार में बांका को मजबूत प्रतिनिधित्व मिलेगा और जिले के किसी विधायक को मंत्री पद से नवाजा जाएगा। लेकिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में और अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में भी बांका को मंत्री पद से वंचित रखे जाने पर लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी है।

राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा थी कि अमरपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक जयंत राज अथवा बेलहर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक मनोज यादव को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। मंत्रिमंडल विस्तार से पहले दोनों नेताओं के समर्थकों में काफी उत्साह देखा जा रहा था। जगह-जगह राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म था और समर्थक अपने-अपने नेताओं के मंत्री बनने को लगभग तय मान रहे थे।

फुट फुट कर रोए प्रखंड जदयू अध्यक्ष बीएल गांधी

लेकिन गुरुवार को जब सम्राट मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ और उसमें बांका जिले के किसी भी विधायक को स्थान नहीं मिला, तो जिले की राजनीति में मायूसी छा गई। आम जनता के साथ-साथ एनडीए समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी बड़ा झटका लगा है। लोगों का कहना है कि जब बांका की जनता ने एनडीए को पांचों सीटों पर ऐतिहासिक जीत दिलाई, तब सरकार गठन में जिले की अनदेखी समझ से परे है। खासकर शंभूगंज प्रखंड जदयू अध्यक्ष बीएल गांधी तो बांका को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने पर फूट-फूट कर रोने लगे, इसके बाद प्रखंड जदयू उपाध्यक्ष दिनेश मंडल और नवल मंडल ने उन्हें संभाल कर ढ़ाढ़स दिलाया और उसे घर ले गए।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांका जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले को लगातार मंत्री पद से दूर रखना भविष्य में एनडीए के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। जिले के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार सरकार में बांका की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिससे क्षेत्र के विकास कार्यों को गति मिलती। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह उम्मीद फिलहाल टूटती नजर आ रही है।

इधर सोशल मीडिया से लेकर गांव-चौपाल तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सरकार बनने के बाद बांका की उपेक्षा की जा रही है। समर्थकों का यह भी कहना है कि यदि जिले के किसी विधायक को मंत्री बनाया जाता, तो बांका के विकास से जुड़े लंबित कार्यों को सरकार में मजबूती से उठाया जा सकता था।

फिलहाल सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर बांका को मंत्री पद से लगातार क्यों दूर रखा जा रहा है। जिले की जनता अब आने वाले दिनों में सरकार और पार्टी नेतृत्व की ओर से किसी सकारात्मक पहल की उम्मीद लगाए बैठी है।



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