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ब्रेकिंग न्यूज : एक ही चिता, दो दिलों की विदाई, इस दृश्य ने हर किसी की आंखें कर दी नम

   सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार

एक ही चिता, दो दिलों की विदाई: पत्नी के जाने के घंटों बाद पति ने भी तोड़ा दम, भलुआ गांव में गम का सैलाब

बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र के भलुआ गांव से एक ऐसी दर्दनाक और भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। यहां 75 वर्षीय मनोरमा देवी के निधन के कुछ ही घंटों बाद उनके 80 वर्षीय पति नरेश शर्मा ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। 

जीवनभर साथ निभाने वाले इस दंपती ने मृत्यु के क्षणों में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। दोनों को एक साथ अंतिम विदाई दी गई और एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दृश्य ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।

परिजनों के अनुसार, मनोरमा देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उनका निधन हो गया। वर्षों से साथ निभाने वाली पत्नी के अचानक चले जाने से नरेश शर्मा गहरे सदमे में चले गए। परिवार के लोग उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे इस दुख को सहन नहीं कर सके। पत्नी के निधन के महज कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने भी अंतिम सांस ले ली। इस घटना ने पूरे परिवार को अंदर तक झकझोर दिया।

मृतक के पुत्र अशोक शर्मा ने बताया कि उनके माता-पिता का रिश्ता बेहद मजबूत और अटूट था। दोनों ने जीवनभर एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। हर परिस्थिति में साथ खड़े रहे। मां के जाने के बाद पिता जैसे पूरी तरह टूट गए थे और कुछ ही घंटों में उन्होंने भी हमें छोड़ दिया, उन्होंने नम आंखों से कहा। उनकी बातों से साफ झलक रहा था कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक गहरे रिश्ते का अंत है।

नरेश शर्मा गांव में एक मेहनती और सादगी पसंद व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। वे पुश्तैनी बढ़ईगिरी के साथ-साथ खेती-किसानी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। वहीं मनोरमा देवी एक समर्पित गृहिणी थीं, जिन्होंने पूरे परिवार को प्रेम और संस्कारों से जोड़े रखा। दोनों ने लगभग छह दशकों तक साथ जीवन बिताया और गांव में एक आदर्श दंपती के रूप में उनकी पहचान थी।

घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचकर अंतिम दर्शन करने लगे। हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि ऐसा अटूट प्रेम और समर्पण आज के समय में बहुत कम देखने को मिलता है। लोग इस घटना को अद्भुत तो बता ही रहे हैं, साथ ही इसे बेहद दुखद भी मान रहे हैं।

ग्रामीणों ने दोनों को एक साथ अंतिम विदाई देने का निर्णय लिया। पूरे गांव की मौजूदगी में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। माहौल इतना भावुक था कि हर आंख नम थी और हर दिल भारी। इसके बाद अजगैबीनाथ धाम स्थित गंगा तट पर दोनों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गया।

भलुआ गांव की यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह केवल एक दुखद घटना नहीं, बल्कि सच्चे प्रेम, समर्पण और अटूट रिश्ते की ऐसी मिसाल है, जो यह सिखाती है कि कुछ रिश्ते जीवन की सीमाओं से परे होते हैं और उनका साथ आखिरी सांस तक बना रहता है।



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