सुरज कुमार APP न्यूज ब्यूरो रिपोर्ट, पटना बिहार
राज्यसभा जाएंगे नीतीश कुमार , 5 मार्च को नामांकन की संभावना, बिहार की राजनीति में हलचल तेज
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 5 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस संभावित कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और सत्ता के शीर्ष स्तर पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को सुबह करीब 11:30 बजे पटना में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। इस मौके पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई बड़े नेता भी मौजूद रह सकते हैं। जानकारी के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के भी इस दौरान पटना में उपस्थित रहने की खबर है। यदि ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के साथ ही राज्य की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि अगर वे राज्यसभा के सदस्य बनते हैं तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं और एनडीए के भीतर नेतृत्व को लेकर नई रणनीति बन सकती है।
इसी बीच एक और चर्चा ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार भी जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे जदयू की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि जदयू के कुछ नेताओं और सूत्रों ने इन खबरों का खंडन भी किया है और कहा है कि फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इसके बावजूद पटना में लगातार हो रही बैठकों, नेताओं की सक्रियता और राजनीतिक गतिविधियों ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है।
अब सबकी निगाहें 5 मार्च पर टिकी हुई हैं। यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार वास्तव में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते हैं, तो यह कदम न केवल बिहार बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा संदेश देने वाला साबित हो सकता है।





