विपिन सिंह APP न्यूज डेस्क रिपोर्ट, बांका बिहार
फुलवासा पोखर में घोटाले की बू, अधूरे काम और पारदर्शिता पर किसानों का फूटा गुस्सा
बांका जिले के अमरपुर प्रखंड में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 14 स्थित महमदपुर मोहल्ले के फुलवासा पोखर में चल रहे जीर्णोद्धार कार्य को लेकर मंगलवार को किसानों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। बिना योजना बोर्ड लगाए और कथित रूप से मनमाने ढंग से कराए जा रहे खुदाई कार्य के खिलाफ किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जानकारी के अनुसार लघु जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 12 बीघा क्षेत्र में फैले फुलवासा पोखर के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण की योजना स्वीकृत की गई थी। इस योजना से महमदपुर, डुमरामा, रघुनाथपुर, बनियाचक और कोयरीचक समेत कई गांवों के सैकड़ों बीघा खेतों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।
प्रदर्शन कर रहे किसानों का आरोप है कि संवेदक द्वारा मात्र 7 से 8 बीघा क्षेत्र में ही खानापूर्ति के तौर पर खुदाई की जा रही है। वहीं खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाए जा रहे नालों की चौड़ाई भी महज छह इंच रखी जा रही है, जो भविष्य में सिंचाई के लिए नाकाफी साबित होगी। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर योजना से संबंधित कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया है, जिससे योजना की लागत, अवधि और प्राक्कलन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पूरी तरह छिपी हुई हैं।
प्रदर्शन में शामिल मोहन यादव, राजकिशोर झा, सुभाष यादव, विजय कुमार, गणेशलाल दास, मनोहर यादव, तुलसी यादव, निरज कुमार, ब्रह्मदेव रजक, रतुली यादव, अरविन्द यादव, गैवी रजक, नन्दु यादव, सोम कुमार, रवि कुमार, बुधन यादव, डोमी तांती, प्रकाश रजक, अभिषेक यादव और टुनटुन तांती समेत दर्जनों किसानों ने एक स्वर में मांग की कि पोखर की पूरी स्वीकृत भूमि पर गुणवत्तापूर्ण खुदाई कराई जाए, सिंचाई के लिए पर्याप्त चौड़े नाले बनाए जाएं और योजना की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
मामले पर विभाग की एसडीओ शिल्पा सोनी ने कहा कि यह योजना किसानों के हितों से सीधे जुड़ी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिली है और जल्द ही स्थल निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया जाएगा। साथ ही दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन की कार्रवाई से किसानों को राहत मिलती है या नहीं।
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