सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार
महंगाई-बेरोजगारी पर बजट खामोश, आम जनता को नहीं मिली राहत : राजद नेता संजय चौहान
देश और बिहार के हालिया बजट को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता एवं शिक्षाविद संजय चौहान ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की बदहाली जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता। उनके अनुसार यह बजट आम जनता की जरूरतों को पूरा करने में विफल साबित हुआ है और गरीब, किसान, मजदूर, युवा तथा पिछड़े वर्गों के लिए कोई ठोस राहत नहीं दी गई है।
केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन सरकार ने केवल पुराने वादों को दोहराया है। न तो स्थायी रोजगार सृजन पर स्पष्ट नीति दिखाई देती है और न ही सरकारी भर्तियों को लेकर ठोस घोषणा की गई है।
उन्होंने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन बजट में इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है। उनके मुताबिक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि देश के विकास की नींव इन्हीं क्षेत्रों पर टिकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े उद्योगपतियों को राहत देती है, लेकिन गरीबों को मिलने वाली सब्सिडी को बोझ मानती है।
बिहार बजट पर टिप्पणी करते हुए राजद नेता ने कहा कि राज्य की वास्तविक समस्याओं—जैसे पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी—को केवल कागजी योजनाओं तक सीमित रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बजट में बड़े आंकड़े जरूर दिखाए गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि योजनाओं का लाभ गांवों, गरीबों और वंचित तबकों तक कैसे पहुंचेगा।
संजय चौहान ने यह भी कहा कि यदि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलता, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव था। उनके अनुसार राज्य सरकार को केंद्र पर दबाव बनाना चाहिए था, लेकिन उसने समझौते का रास्ता चुना। अंत में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल ऐसे बजटों का विरोध जारी रखेगा, जो सामाजिक न्याय, समान विकास और आम जनता के हितों की अनदेखी करते हैं।




