सुबोध सिंह, क्राइम रिपोर्टर बांका, बिहार
परमाणु परियोजना के विरोध में रघुनाथपुर में जुटे ग्रामीण, बारिश में भी चली बैठक
किसान, आदिवासी और दलित ग्रामीणों ने जमीन, पानी, खेती व पर्यावरण को लेकर जताई चिंता; संजय चौहान ने संवाद के जरिए समाधान की मांग की
बांका जिले के बेलहर प्रखंड के रघुनाथपुर में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना को लेकर रविवार को ग्रामीणों की बैठक हुई। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में किसान, आदिवासी, दलित और स्थानीय ग्रामीण बैठक में शामिल हुए। ग्रामीणों ने प्रस्तावित परियोजना से जमीन, पानी, खेती, पर्यावरण, सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। ग्रामीणों ने कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकार और हितों को ध्यान में रखे बिना किसी भी बड़ी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
बैठक को संबोधित करते हुए संजय चौहान ने कहा कि विकास और रोजगार जरूरी हैं, लेकिन किसानों की जमीन, खेती और भविष्य की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र उद्योग, वाहन उद्योग समेत अन्य रोजगारपरक क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रोजगार के अन्य विकल्प मौजूद हैं तो बांका के कृषि क्षेत्र में परमाणु परियोजना लगाने की आवश्यकता क्यों है।
उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय, सामाजिक, स्वास्थ्य, जल और सुरक्षा संबंधी प्रभावों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मूल्यांकन होना चाहिए। उन्होंने फुकुशिमा हादसे तथा विभिन्न देशों के परमाणु ऊर्जा से जुड़े अनुभवों का उल्लेख करते हुए परियोजना से पहले व्यापक अध्ययन की जरूरत बताई।
संजय चौहान ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से ग्रामीणों के साथ संवाद कायम करने तथा किसी भी दबावपूर्ण कार्रवाई से बचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अपनी जमीन, जल, खेती और भविष्य से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, इसलिए उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
बैठक में ग्रामीणों ने परियोजना से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब देने की मांग की और कहा कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
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