सूरजकांत, ब्यूरो रिपोर्ट, पटना (बिहार)
मृत रैयतों के उत्तराधिकारियों को बड़ी राहत: अब घर-घर जाकर होगी दाखिल-खारिज की प्रक्रिया
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन मालिकों और उनके उत्तराधिकारियों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब मृत रैयतों के उत्तराधिकारियों को दाखिल-खारिज और जमाबंदी अपने नाम कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विभाग के निर्देशानुसार अब राजस्व कर्मचारी गांव-गांव और घर-घर जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे तथा स्वतः संज्ञान लेकर जमाबंदी को उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, राजस्व कर्मचारी मृत रैयतों के कानूनी वारिसों से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे। मृतक की पहचान जन्म-मृत्यु पंजीकरण, चौकीदार की रिपोर्ट तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर की जाएगी। इसके लिए उत्तराधिकारियों को अलग से आवेदन देने की आवश्यकता नहीं होगी।
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यदि पारिवारिक बंटवारे से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तब भी केवल उत्तराधिकार के अधिकार के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया प्रारंभ की जा सकेगी। इससे वर्षों से लंबित पड़े हजारों मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है। पूरी प्रक्रिया बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने क्षेत्र के प्रत्येक मौजा में हर महीने कम से कम पांच मृत जमाबंदी धारकों के मामलों का निष्पादन करना अनिवार्य किया गया है। इस कार्य की निगरानी संबंधित अंचल अधिकारी करेंगे, जबकि अपर समाहर्ता एवं भूमि सुधार उप समाहर्ता प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में प्रखंडवार समीक्षा करेंगे। निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले कर्मियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
सरकार के इस फैसले से राज्य के लाखों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही दाखिल-खारिज की प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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