सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार
शंभूगंज के चार होनहारों ने 70वीं बीपीएससी में लहराया परचम, दो बेटियां बनीं प्रेरणा की मिसाल
70वीं बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के घोषित परिणाम में शंभूगंज प्रखंड के चार होनहार अभ्यर्थियों ने शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। इनमें दो पुरुष एवं दो महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। खास बात यह है कि सफल दोनों महिला अभ्यर्थी आंगनबाड़ी सेविकाओं की पुत्रियां हैं, जबकि एक सफल पुरुष अभ्यर्थी आंगनबाड़ी सहायिका के पुत्र हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन युवाओं की सफलता पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
गुलनी गांव निवासी आंगनबाड़ी सेविका शिवानी देवी की पुत्री सोनाली कुमारी ने 106वां रैंक प्राप्त कर एसडीएम पद के लिए चयनित होकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। सोनाली ने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। उनके पिता अरुण सिंह एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से पूरी की और निरंतर मेहनत के बल पर लक्ष्य हासिल किया।
वहीं गिधौड़ा आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-27 की सेविका बबिता कुमारी की पुत्री दिप्ती दिव्या ने 1456वां रैंक प्राप्त कर राजस्व अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया। उनके पिता दिलीप कुमार किसान हैं। दिप्ती की सफलता ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है।
झखरा गांव निवासी रोहित कुमार चौधरी ने 70वां रैंक प्राप्त कर एसडीएम पद हासिल किया। उनकी माता मंजू देवी आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-41 में सहायिका हैं। रोहित ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और द्वारिका अमृत अशर्फी विद्यालय से मैट्रिक करने के बाद भागलपुर में उच्च शिक्षा ग्रहण की। गोरखपुर में नौकरी करते हुए भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और सफलता अर्जित की।
इसी तरह बाजार चटमा निवासी किसान अजीत कुमार सिंह के पुत्र सौरभ कुमार ने 198वां रैंक प्राप्त कर एसडीसी पद के लिए चयन सुनिश्चित किया। वर्तमान में वे आपदा प्रबंधन विभाग में कार्यरत थे और नौकरी के साथ बीपीएससी की तैयारी जारी रखी।
चारों अभ्यर्थियों की सफलता से शंभूगंज प्रखंड में खुशी का माहौल है। जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, समाजसेवियों एवं ग्रामीणों ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। इनकी उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि कठिन परिश्रम, लगन और आत्मविश्वास के बल पर ग्रामीण परिवेश से भी बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं।
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