सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर ,बांका बिहार
वैदपुर पंचायत में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल उजागर, सरपंच के नाम पर बन रहे जमीन के कागजात, प्रशासन में मचा हड़कंप
शंभूगंज प्रखंड क्षेत्र में फर्जीवाड़े का जाल अब गांवों तक गहराता जा रहा है। ताजा मामला वैदपुर पंचायत से सामने आया है, जहां सरपंच के नाम पर फर्जी लेटर पैड और मोहर तैयार कर भूमि बंटवारा नामा एवं वंशावली जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाए जा रहे हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है।
मंगलवार को वैदपुर ग्राम पंचायत की सरपंच विनिता सिंह के निर्देश पर ग्राम कचहरी के न्याय सचिव मनोज कुमार सिंह ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत राजस्व अधिकारी को सौंपी। शिकायत में कहा गया है कि पंचायत के कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए सरपंच के नाम और पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे फर्जी लेटर पैड और मोहर का इस्तेमाल कर जमीन बंटवारे और वंशावली प्रमाण पत्र जैसे संवेदनशील दस्तावेज तैयार कर रहे हैं, जिससे सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शंभूगंज अंचल कार्यालय में कार्यरत एक आरटीपीएस कर्मी को दो अलग-अलग लेटर पैड पर सरपंच के हस्ताक्षर में अंतर नजर आया। संदेह होने पर उसने तत्काल इसकी सूचना राजस्व अधिकारी को दी। सूचना के आधार पर जब प्रारंभिक जांच की गई और ग्राम कचहरी सचिव मौके पर पहुंचे, तो दस्तावेजों की पड़ताल में फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई।
न्याय सचिव मनोज कुमार सिंह ने इस मामले को गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस प्रकार के फर्जी दस्तावेजों के कारण जमीन से जुड़े विवाद बढ़ सकते हैं और कई निर्दोष लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
इधर, राजस्व अधिकारी अभय कुमार ने बताया कि शिकायत प्राप्त होते ही मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने अंचल के सभी कर्मियों को निर्देश दिया है कि वे दस्तावेजों की जांच में पूरी सतर्कता बरतें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोषियों की पहचान होने के बाद कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के फर्जीवाड़े पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती अनियमितताओं और कानून व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर करता है।
प्रशासन के लिए यह घटना एक चेतावनी है कि जमीनी स्तर पर निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत किया जाए, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
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