विपिन सिंह APP न्यूज डेस्क रिपोर्ट, बांका बिहार
जदयू के तीर से घायल गिरधारी यादव, सदस्यता पर संकट, सियासत में बढ़ी हलचल
बांका के जदयू सांसद और कभी पार्टी के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले गिरधारी यादव इन दिनों अपनी ही पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। ताजा घटनाक्रम ने उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जदयू नेतृत्व द्वारा उठाए गए सख्त कदम के बाद जिले से लेकर राज्य स्तर तक सियासी हलचल तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विधानसभा चुनाव के दौरान सांसद गिरधारी यादव ने अपने ही पुत्र चाणक्य प्रकाश को बेलहर विधानसभा सीट से महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतार दिया। इस कदम को जदयू के भीतर पार्टी विरोधी गतिविधि के रूप में देखा गया और तभी से उनके खिलाफ अंदरखाने नाराजगी बढ़ने लगी।
इसके बाद स्थिति और तब गंभीर हो गई जब मुख्यमंत्री की “समृद्धि यात्रा” के दौरान बांका सांसद को आमंत्रण नहीं दिया गया। राजनीतिक जानकार इसे साफ संकेत मान रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व ने उनसे दूरी बना ली थी। धीरे-धीरे यह दूरी अब कार्रवाई के रूप में सामने आ रही है।
इसी क्रम में जदयू संसदीय दल के नेता देवेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र भेजकर गिरधारी यादव की सदस्यता समाप्त करने की मांग कर दी है। पत्र में सांसद पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने का आरोप लगाया गया है। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है।
स्थानीय स्तर पर भी जदयू कार्यकर्ताओं में दो खेमे बनते नजर आ रहे हैं। एक पक्ष जहां पार्टी के निर्णय का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व की चुप्पी अभी भी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब सबकी निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि गिरधारी यादव अपनी सफाई किस तरह पेश करते हैं और क्या वे इस राजनीतिक संकट से उबर पाते हैं या नहीं। फिलहाल, जदयू के ‘तीर’ से घायल यह नेता सियासी मैदान में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं।
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