सुबोध सिंह APP न्यूज क्राइम रिपोर्टर, बांका बिहार
सहमति न बनने से टला बांका जदयू जिलाध्यक्ष चुनाव, फैसला अब प्रदेश नेतृत्व के पाले में
बांका जिला अध्यक्ष पद का चुनाव रविवार को सहमति के अभाव में टल गया। दिनभर चली गहमागहमी और अंदरूनी मंथन के बावजूद दावेदारों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी। अंततः पर्यवेक्षक ने निर्णय प्रदेश नेतृत्व पर छोड़ दिया, जिससे अब सभी की निगाहें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर टिक गई हैं।
जानकारी के अनुसार, निवर्तमान जिलाध्यक्ष अमरेंद्र पटेल ने एक बार फिर अपनी दावेदारी पेश की। उनके अलावा चार अन्य नेताओं ने भी अध्यक्ष पद के लिए दावा ठोक दिया। कुल पांच दावेदारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया, लेकिन सहमति बनाने की कवायद सफल नहीं हो सकी।
चुनाव प्रक्रिया को लेकर पार्टी की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षक ने अलग-अलग दावेदारों और वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक, संगठन की एकजुटता बनाए रखने और सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुनने की कोशिश की गई, लेकिन कोई साझा नाम सामने नहीं आ सका। कुछ नेताओं ने संगठन में अनुभव को प्राथमिकता देने की बात कही, तो कुछ ने नए चेहरे को मौका देने की वकालत की।बैठक के दौरान समर्थकों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी रही। हालांकि माहौल शांतिपूर्ण रहा, लेकिन अंदरखाने खींचतान साफ झलकती रही। अंततः पर्यवेक्षक ने यह कहते हुए चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी कि अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व करेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांका जिला संगठन में अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी सक्रियता आगामी चुनावी समीकरणों से भी जुड़ी है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व किसी ऐसे चेहरे को आगे लाना चाहेगा, जो संगठन को मजबूत करते हुए सभी गुटों को साथ लेकर चल सकेकरेगा।
दावेदारों ने प्रदेश नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है। निवर्तमान अध्यक्ष अमरेंद्र पटेल ने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और जो भी निर्णय होगा, उसे सभी कार्यकर्ता मानेंगे। अन्य दावेदारों ने भी संगठन हित को प्राथमिकता देने की बात दोहराई।
अब देखना यह है कि प्रदेश नेतृत्व किस पर भरोसा जताता है और बांका जदयू की कमान किसे सौंपी जाती है। फिलहाल जिला संगठन में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और कार्यकर्ताओं में फैसले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।





