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अमरपुर शहर के बीचोंबीच कचरे का संकट, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडराता खतरा

 विपिन कुमार सिंह APP न्यूज डेस्क रिपोर्ट, बांका

शहर के बीचोंबीच कचरे का संकट: अमरपुर में स्वास्थ्य और पर्यावरण पर मंडराता खतरा

बांका जिले के अमरपुर नगर पंचायत क्षेत्र में शहर के बीचोंबीच जमा कचरे का ढेर अब केवल गंदगी का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह आम नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ठोस कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में खाली प्लॉटों, सड़कों के किनारे और नालों के आसपास खुले में कचरा फेंक रहे हैं या उसे जला रहे हैं। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं पूरे इलाके में फैलकर लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है।

नगर पंचायत के कई वार्डों में सुबह और शाम कचरा फेंकना अब आम दृश्य बन चुका है। प्लास्टिक, पॉलिथीन, गीला कचरा और घरेलू अपशिष्ट एक साथ जलाए जाने से घना काला धुआं उठता है, जो घंटों तक हवा में बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दुर्गंध और धुएं के कारण बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और दमा के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

वार्ड संख्या 10 के निवासी मो. तन्नू का कहना है कि शहर में कचरा उठाने की प्रक्रिया तो होती है, लेकिन उसे शहर के बीचोंबीच मैदान में फेंक दिया जाता है। इससे दुर्गंध फैलती है और इसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ता है। कई लोगों को रात में सांस लेने में तकलीफ होने लगी है, जिससे चिंता बढ़ गई है।

डॉक्टरों की चेतावनी: कचरा जलाना बेहद खतरनाक
रेफरल अस्पताल के चिकित्सकों ने खुले में कचरा जलाने से निकलने वाले धुएं को अत्यंत हानिकारक बताया है। डॉक्टरों के अनुसार प्लास्टिक और गीले कचरे को जलाने से डाइऑक्सिन और फ्यूरान जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जो फेफड़ों, आंखों और त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। बीते कुछ महीनों में सांस, एलर्जी और आंखों में जलन की शिकायत लेकर अस्पताल आने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं में भी देखी जा रही है।

नगर पंचायत ने मानी समस्या, समाधान अभी अस्पष्ट
नगर पंचायत प्रशासन ने कचरा प्रबंधन की समस्या को स्वीकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि सीमित संसाधनों के कारण घर-घर कचरा संग्रह तो किया जा रहा है, लेकिन उसके वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। भविष्य में नई योजना पर विचार करने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक किसी ठोस समय-सीमा या मॉडल की घोषणा नहीं हुई है। इससे स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

सफल मॉडल की उम्मीद और नागरिकों की भागीदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जैसे शहरों का मॉडल अमरपुर में भी अपनाया जा सकता है, जहां गीले और सूखे कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण कर कंपोस्ट तैयार किया जाता है। इससे न केवल प्रदूषण कम होता है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बनते हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन ठोस पहल करे, तो लोग सहयोग के लिए तैयार हैं।

जिम्मेदारों का बयान
नगर पंचायत की स्वच्छता पदाधिकारी अभिलाषा अपूर्वा ने बताया कि कचरे के निस्तारण के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। ड्रोन सर्वे के माध्यम से आकलन कर डुमरामा सहित अन्य जगहों पर जमा कचरे का बायोरेमिडिएशन किया जाएगा और समस्या का स्थायी समाधान खोजा जाएगा।

अमरपुर में कचरा प्रबंधन की समस्या अब अनदेखी करने लायक नहीं रह गई है। यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। प्रशासनिक इच्छाशक्ति, ठोस योजना और जनभागीदारी के बिना इस संकट से उबरना मुश्किल है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

       प्रस्तुति- वरीय संवाददाता विपिन कुमार सिंह



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